प्रवेश परीक्षा के दिनों में ना करें ये 3 ग़लतियां

आम तौर पर हर साल गर्मियों का मौसम और प्रवेश परीक्षा का मौसम साथ साथ ही आता है। दोनो ही ज़्यादातर लोगों के पसीने भी छुड़ा देते हैं । इन दिनों में विद्यार्थी पढ़ने में इस तरह जुट जाते हैं की वे अपने तमाम शौक जैसे क्रिकेट खेलना, पेंटिंग करना, या बॉलीवुड न्यू सांग्स सुनना, इत्यादि त्याग देते हैं ।

इन परीक्षाओं को बहुत गंभीरता से ना लें और साथ ही इन तीन बढ़ी गलतियों को करने से बचें –

 

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बुनियादी सिद्धांत से ना भागें

 

  • अधिकतर छात्र – छात्राएं इम्तिहान से पहले रट्टा मार कर पढाई में जुट जातें हैं । इससे वे चंद इतिहास की तारीखें या फिजिक्स के फॉर्मूले तो याद रख सकते हैं, लेकिन उस फॉर्मूले के पीछे के हिसाब नहीं याद रख सकते। इसीलिए ये ज़रूरी है कि आप अपनी पढाई अपने विषय के कॉन्सेप्ट या सिद्धांतों को समझ कर करें ।
  • इसका दूसरा फायदा ये है की यह परीक्षा के दौरान किसी तरह के पेचीदा प्रश्न से भ्रमित होने की संभावनाओं को बहुत कम कर देगा।

 

MCQs से सावधान

 

  • ज़्यादातर प्रवेश परीक्षाओं में प्रश्न बहुविकल्पी रूप से पूछे जाते हैं। इन्हे अंग्रेजी में MCQ भी कहा जाता है । एक-एक अंक वाले यह प्रश्न फ़टाफ़ट कर लिए जाते हैं, परन्तु कई विद्यार्थी इस में एक बड़ी गलती कर बैठते हैं । वे या तो पिछले वर्षों के पेपर को पढ़ कर या फिर अपने ट्यूटर के कहने में आकर इन प्रश्नों में एक पैटर्न या समानता ढूंढने की कोशिश करते हैं ।

 

  • ऐसी स्थिति में, वे सवाल और इसके विकल्पों को सावधानी से नहीं पढ़ते हैं और इसके बजाय अपने स्वयं के सहज पैटर्न का पालन करते हैं। ऐसा करना आपको ना केवल ग़लत जवाब दिलाएगा बल्कि नेगेटिव अंक भी देगा ।

 

टीचर का सहारा लेना ना भूलें

 

  • अपने पैसे बचाने के लिए कुछ छात्र खुद पढाई करते हैं और किसी अनुभवी विशेषज्ञ से सहारा नहीं लेते। कुछ छात्र इस फॉर्मूले से सफ़ल हो जाते हैं पर अधिकतर छात्र एग्जाम के नज़दीक आने से घबराने लगते हैं। इसकी मूल वजह किसी पर्सनल मेंटर या टीचर का ना होना होता है ।

 

  • ऐसी स्थिति में एक बढ़िया विकल्प साबित होते हैं online tutorial और E-Mock paper जो आसानी से किसी सोशलनेटवर्किंग साइट इंडिया पर मिल जाते हैं । ये ऑनलाइन ट्यूटोरियल वीडियो के रूप में इंटरैक्टिव होते हैं और बिना पैसे खर्चे एक पर्सनल ट्यूटर का एहसास भी करा देते हैं ।

 

इस लेख की शुरआत हुई थी गर्मियों से, तो अंत भी उसी बात से करते हैं । गर्मियां सिर्फ़ साल में एक बार आकर एक नए मौसम की ओर मुड़ जाती हैं पर अक्सर हम एग्जाम या परीक्षा को अपने जीवन से ही जोड़ लेते हैं और उसके बारे में सोच सोच कर चिंतित रहने लगते हैं । इस चिंता या टेंशन के नतीजे का सीधा प्रभाव आपकी परीक्षा की तैय्यारी पर दिखता है।

अंत में यह याद रखें की एग्जाम आपकी ज़िन्दगी में केवल एक टेस्ट है, वह आपकी ज़िन्दगी का टेस्ट नहीं है ।

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